दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है और मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला हूं। आज मैं आपको अपनी भाभी के साथ हुई मेरी पहली चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं।
यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में सेकंड ईयर में पढ़ता था। मेरे बड़े भैया की शादी को सिर्फ छह महीने ही हुए थे। भैया एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे और अक्सर टूर पर बाहर रहते थे।
मेरी भाभी का नाम प्रिया था। उस वक्त वह 24 साल की थीं और देखने में बहुत ही खूबसूरत थीं। उनका फिगर करीब 36-28-38 का था। उनके बड़े-बड़े दूध और गोल-मटोल गांड देखकर कोई भी मर जाए। उनकी गोरी चमड़ी और लंबे काले बाल उनको और भी सेक्सी बना देते थे।
मैं और भाभी घर में अक्सर अकेले ही रहते थे क्योंकि भैया सुबह निकल जाते और शाम को ही लौटते। इस वजह से मेरी और भाभी की बहुत अच्छी बनती थी। हम दोनों साथ में खाना खाते, टीवी देखते और घंटों बातें करते।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरे मन में भाभी के प्रति कुछ अलग ही भाव आने लगे थे। जब भी वो घर के कामों में लगी रहतीं, मेरी नजर उनके जिस्म पर ही टिकी रहती। उनके ब्लाउज से झांकते हुए दूध और साड़ी में कसी हुई गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता।
एक दिन की बात है। मेरे कॉलेज में अचानक छुट्टी हो गई क्योंकि प्रोफेसर की तबीयत खराब हो गई थी। मैं सुबह 11 बजे ही घर वापस आ गया। घर में कोई नहीं था क्योंकि मम्मी-पापा गांव गए हुए थे और भैया ऑफिस गए थे।
मैंने सोचा भाभी शायद सो रही होंगी। मैं चुपचाप अपने कमरे की तरफ बढ़ा तभी रसोई से कुछ आवाजें आईं। मैंने रसोई की तरफ देखा तो मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।
भाभी ने साड़ी पहनी हुई थी लेकिन उन्होंने पल्लू अपने सिर पर नहीं रखा था। उनका ब्लाउज काफी गहरा था और उनके मोटे दूध आधे बाहर झांक रहे थे। वो गैस पर खाना बना रही थीं और अपने हाथ से बाल संवार रही थीं। उनकी पीठ मेरी तरफ थी और उनकी गांड का आकार साड़ी में से साफ दिख रहा था।
मैं वहीं खड़ा होकर उन्हें देखता रहा। मेरे अंदर अचानक से एक जुनून सा भर आया। मैंने सोचा आज तो मौका है और दस्तूर भी। घर में कोई नहीं है। मैंने हिम्मत करके रसोई में कदम रखे।
"भाभी," मैंने धीरे से आवाज लगाई।
भाभी चौंक कर मेरी तरफ मुड़ीं। उन्होंने मुझे देखा तो राहत की सांस ली।
"अरे अर्जुन, तुम इतनी जल्दी कैसे आ गए? मैं तो तुम्हारे लिए खाना बना ही रही थी," भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा।
"कॉलेज में छुट्टी हो गई भाभी," मैंने कहा और उनके पास गया।
जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, उनकी खुशबू मेरे नाक में भर गई। वो इतनी करीब थीं कि मैं उनके दूध की गर्मी महसूस कर सकता था। मेरा लंड पैंट में तम्बू बनाने लगा था।
"भाभी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं," मैंने हिम्मत करके कहा।
भाभी ने मुझे एक अजीब सी नजर से देखा। उनके चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान आई।
"अच्छा? और पहले खूबसूरत नहीं लगती थी?" भाभी ने मजाक में कहा।
"पहले भी लगती थीं, लेकिन आज कुछ अलग ही लग रही हैं," मैंने कहा और एक कदम और आगे बढ़ गया।
मैं अब उनके बिल्कुल पीछे खड़ा था। रसोई की जगह छोटी थी। भाभी गैस के पास खड़ी थीं और मैं उनके पीछे। मेरा लंड उनकी गांड को छू रहा था। मुझे लगा कि भाभी ने इस बात को नोटिस किया है लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
"भाभी, मुझे बहुत प्यास लगी है," मैंने कहा।
"फ्रिज में पानी रखा है, ले लो," भाभी ने कहा।
"नहीं भाभी, मुझे कुछ और पीना है," मैंने कहा और अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए।
भाभी चौंक गईं। वो मेरी तरफ मुड़ने लगीं लेकिन मैंने उन्हें रोक लिया। मैंने अपने हाथ उनकी कमर से आगे बढ़ाते हुए उनके पेट पर रख दिए। मेरे हाथ गर्मी से तप रहे थे।
"अर्जुन, यह तुम क्या कर रहे हो? यह ठीक नहीं है," भाभी ने धीरे से कहा लेकिन उन्होंने मेरे हाथ नहीं हटाए।
"भाभी, प्लीज, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। मेरा दिल करता है कि मैं आपको अपनी बाहों में भर लूं," मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा।
भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उनकी सांसें तेज हो गईं थीं। मैं समझ गया कि भाभी भी मेरे साथ कुछ महसूस कर रही हैं।
"अर्जुन, हम ऐसा नहीं कर सकते। तुम मेरे देवर हो," भाभी ने कहा।
"भाभी, देवर भी तो पति के बराबर होता है। और भैया तो हमेशा बाहर रहते हैं। आपकी जरूरतों का ख्याल कौन रखेगा?" मैंने कहा और अपने हाथ उनके ब्लाउज की तरफ बढ़ा दिए।
मैंने अपने हाथों से उनके दूध को सहलाना शुरू कर दिया। भाभी ने एक हल्की सी आह भरी लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके मोटे दूधों को दबाना शुरू कर दिया।
"ओह अर्जुन, प्लीज ऐसा मत करो," भाभी ने कहा लेकिन उनकी आवाज कमजोर थी।
"भाभी, आप भी तो चाहती हैं यह सब। मैं देख सकता हूं आपकी आंखों में वो प्यास," मैंने कहा और उनको अपनी तरफ घुमा लिया।
अब भाभी मेरे सामने थीं। उनके चेहरे पर शर्मिंदगी और कामुकता का मिश्रण था। मैंने उनकी ठोड़ी को उठाया और उनकी आंखों में देखने लगा।
"क्या मैं आपको किस कर सकता हूं भाभी?" मैंने पूछा।
भाभी ने शर्माते हुए अपनी आंखें नीचे कर लीं। यह मेरे लिए हां का संकेत था। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहले तो मैंने धीरे-धीरे उनके होंठों को चूमा, फिर मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी। भाभी भी अब गर्म हो चुकी थीं। उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया और मेरी जीभ को अपनी जीभ से चूसने लगीं।
हम दोनों रसोई में ही एक-दूसरे को किस करने लगे। मैंने अपने हाथ उनकी पीठ पर फेरने शुरू कर दिए और धीरे-धीरे उनकी गांड पर ले गया। उनकी गांड इतनी मुलायम और गोल थी कि मेरा लंड पागल हो रहा था।
करीब दस मिनट तक किस करने के बाद मैंने भाभी से अलग होकर उनकी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। भाभी ने भी मदद की और कुछ ही पलों में वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गईं।
मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खोल दिए। जब मैंने उनका ब्लाउज खोला तो मैं तो देखता ही रह गया। भाभी ने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उनके गोरे दूधों पर बहुत सेक्सी लग रही थी।
मैंने उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके दूधों को चूसना शुरू कर दिया। भाभी ने अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिए और मुझे अपने दूधों पर दबाने लगीं।
"ओह अर्जुन, और जोर से चूसो," भाभी ने मोन करते हुए कहा।
मैंने एक हाथ से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और उनके दूध आजाद हो गए। वो इतने बड़े और गोल थे कि मैं उन्हें देखता ही रह गया। बीच में गुलाबी रंग की निप्पल्स उभरी हुई थीं।
मैंने एक दूध को अपने मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। भाभी की आहें निकलने लगीं। वो सीढ़ियों की तरह सीटकां रही थीं।
"हां अर्जुन, ऐसे ही चूसो, बहुत मजा आ रहा है," भाभी ने कहा।
मैंने दूसरे दूध को भी नहीं छोड़ा और उसे भी अपने हाथों से मसलते हुए चूसने लगा। भाभी पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। उनका पेटीकोट भी गीला हो गया था।
"अर्जुन, प्लीज अब और मत तड़पाओ, मुझे तुम्हारा लंड चाहिए," भाभी ने कहा।
मैंने उनसे अलग होकर अपनी टी-शर्ट और जींस उतार दी। मेरा लंड अंडरवियर में तम्बू बनाए खड़ा था। जब भाभी ने उसका आकार देखा तो उनकी आंखें चौड़ी हो गईं।
"वाह, तुम्हारा तो बहुत बड़ा है," भाभी ने कहा और खुद ही मेरे अंडरवियर को नीचे खींच दिया।
मेरा 7 इंच लंबा और मोटा लंड उनके सामने था। भाभी ने उसे अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगीं।
"इसे चूसोगी भाभी?" मैंने पूछा।
"हां, मैं इसे अपने मुंह में लेना चाहती हूं," भाभी ने कहा और नीचे घुटनों के बल बैठ गईं।
उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। वो पूरे जोश से मेरे लंड को चूस रही थीं और मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने अपने हाथ उनके सिर पर रख दिए और उनके मुंह में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।
"ओह भाभी, क्या चूस रही हो, बहुत मजा आ रहा है," मैंने कहा।
भाभी ने मेरे लंड को पूरा गले तक ले लिया। उनकी गर्मी और नमी मेरे लंड को पागल बना रही थी। मैं करीब पंद्रह मिनट तक उनके मुंह में अपना लंड चलाता रहा।
फिर मैंने उन्हें उठाया और उनका पेटीकोट खोल दिया। भाभी ने सफेद रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी पैंटी को नीचे खींचा और उनकी चूत देखी।
उनकी चूत बिल्कुल साफ शेव थी। गुलाबी रंग की चूत से पानी टपक रहा था। मैंने उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाया तो भाभी कांप उठीं।
"अर्जुन, प्लीज अब डाल दो, मैं और इंतजार नहीं कर सकती," भाभी ने कहा।
"नहीं भाभी, पहले मैं इसे चाटना चाहता हूं," मैंने कहा और नीचे घुटनों के बल बैठ गया।
मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। भाभी की चूत का स्वाद बहुत मीठा था। मैंने उनकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल दी और चाटने लगा।
"ओह हां, अर्जुन, और जोर से चाटो, मैं पागल हो रही हूं," भाभी ने चिल्लाते हुए कहा।
मैंने उनकी चूत को जोर-जोर से चाटा और उनकी क्लिट को भी अपने होंठों में लेकर चूसा। भाभी का पूरा शरीर कांप रहा था। उन्होंने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया।
कुछ ही देर में भाभी झड़ गईं और उनकी चूत से पानी मेरे मुंह में भर गया। मैंने सारा रस पी लिया।
"अब डालो अर्जुन, प्लीज," भाभी ने कहा।
मैंने उन्हें रसोई के काउंटर पर बैठने के लिए कहा। भाभी काउंटर पर बैठ गईं और अपने पैर फैला दिए। उनकी चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और पानी से तर थी।
मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत के मुहाने पर रखा और एक जोर का धक्का दिया।
"आह! धीरे अर्जुन, बहुत दर्द हो रहा है," भाभी ने चिल्लाया।
मैंने थोड़ा रुककर फिर से धक्का दिया। इस बार मेरा आधा लंड उनकी चूत में घुस गया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। मैंने फिर से एक जोर का धक्का दिया और मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया।
"ओह माय गॉड, तुम्हारा तो बहुत अंदर चला गया," भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। पहले तो धीरे-धीरे और फिर जोर-जोर से। रसोई में चुदाई की आवाजें गूंजने लगीं।
"ठप ठप ठप" की आवाज के साथ मैं भाभी की चूत में अपना लंड पेल रहा था।
"हां अर्जुन, और तेज चोदो, मुझे बहुत मजा आ रहा है," भाभी ने कहा।
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मैं उनके दूधों को भी दबाते हुए चोद रहा था। भाभी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
"भाभी, आपकी चूत तो बहुत मस्त है," मैंने कहा।
"तुम्हारा लंड भी बहुत मोटा है अर्जुन, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है," भाभी ने कहा।
हम दोनों करीब बीस मिनट तक इसी तरह चुदाई करते रहे। फिर मैंने भाभी को नीचे उतारा और उन्हें कुत्ती बनने के लिए कहा। भाभी झट से कुत्ती बन गईं। उनकी गांड का आकार देखकर मेरा लंड और भी ज्यादा कड़क हो गया।
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा और फिर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया।
"आह! और जोर से अर्जुन, मेरी चूत फाड़ दो," भाभी ने कहा।
मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। मेरे थप्पड़ उनकी गांड पर पड़ रहे थे और वो और भी ज्यादा गर्म हो रही थीं।
"ओह हां, मैं झड़ने वाली हूं, और तेज करो," भाभी ने कहा।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाए और भाभी एक जोरदार आह के साथ झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया और मुझे भी आने का एहसास हुआ।
"भाभी, मैं भी आने वाला हूं," मैंने कहा।
"अंदर ही निकाल दो अर्जुन, मुझे तुम्हारा वीर्य चाहिए," भाभी ने कहा।
मैंने आखिरी धक्का लगाया और मेरा लंड भाभी की चूत में ही फट पड़ा। मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में ही छोड़ दिया। वो गर्म गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया।
हम दोनों थक कर रसोई के फर्श पर गिर गए। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर किस किया।
"यह बहुत अच्छा था अर्जुन, तुम बहुत अच्छा चोदते हो," भाभी ने कहा।
"भाभी, आज के बाद जब भी आप चाहें, मैं आपकी सेवा के लिए तैयार हूं," मैंने कहा।
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, "अब तो मैं रोज तुमसे चुदवाऊंगी।"
हम दोनों उठे और कपड़े पहने। भाभी ने मेरे लिए खाना बनाया और हम दोनों ने साथ में खाना खाया। उस दिन के बाद से मेरी और भाभी की रोज चुदाई होने लगी।